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Showing posts from August, 2022

"रोटी तो खानी हैं"

 "रोटी तो खानी हैं" कभी रुखी कभी सूखी       रोटी तो खानी हैं   थोडीसी खुशिया बाकी आँखो में पानी हैं..... कभी रुखी कभी सुखी रोटी तो खानी हैं !!१!! मन हैं दुःखों से भरा बडी दुःखभरी जिन्दगी की एक अजब कहानी हैं... कभी रुखी कभी सूखी रोटी तो खानी हैं...!!२!! खूब सारी मेहनत मिलती मजदूरी थोडी मनमानी औरो की सहनी हैं... कभी रुखी कभी सूखी रोटी तो खानी हैं.... !!३!! आज मन परेशान हैं खुषीयो की एक आसं कभी तो शाम सुहानी सबके आंगण आनी हैं... कभी रुखी, कभी सूखी रोटी तो खानी हैं....!!४!! दिनांक:२२/०८/२०२२  कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. @जनार्दन

"मुरली मनोहर"

 " मुरली मनोहर" मुरली की धुन में होकर बेधुंद नाचे गोपिया, महके मधुर सुगंध बहती यमुना नदी के तट पर आए गोपिया सज,धज कर   !!१!! माखन खाए नंद किशोर मन ही मन में आनंद विभोरं संग अपने मित्रो को लाए चुरा, चुराकर सब माखन खाए  !!२!! घुस्से वाले थे कंस मामा संग कृष्ण के मित्र सुदामा हात में मुरली,बेहद सुरेली मैदान में खेले डंडा गिल्ली !!३!! मोहक सुंदर, आंख मीचौली रास रचाए, खेले माखन होली यशोदा मैया कहे कन्हैया कृष्ण नाचे ता, ता थैया !!४!!     कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद @जनार्दन

"स्वातंत्र्याचा अमृत महोत्सव"

 विषय  : "स्वातंत्र्याचा अमृत महोत्सव" काव्य प्रकार: मुक्तछंद शीर्षक:"स्वातंत्र्य दिवाळी" आपलाच भारत, आपुलेच जन स्वातंत्र्याचा अमृत महोत्सव सण कुठं उपोषण, कुठे कुपोषण वाढती महागाई, आणि प्रदुषण !!१!! आजही बेरोजगारी, आणि बेकारी मग काय कामाची असून हुशारी वरचेवर भरती होई आपो आप सोसतो झळा, बेकारीच्या निष्पाप  !!२!! अनेक गोष्टींचे, व्हावे निरसन  करुन सारे विचार मंथन भारतात आपल्या, घडावे परिवर्तन बेकारास नोकरी, द्यावी आवर्जुन !!३!! बेकार किती, नोकरीस किती याची करावी, नित्य गणती भुकेल्यास भाकरी,गरजवंतास नोकरी हिच स्वातंत्र्याची ठरेल सीमा खरी !!४!! अमृत महोत्सव होईल साजरा खरा जेंव्हा येईल सुख गरीबा घरा  निनादेल स्वातंत्र्याची आनंद भूपाळी खरी साजरी होईल स्वातंत्र्य दिवाळी !!५!! अमृत महोत्सव हा स्वातंत्र्याचा आहे हक्क प्रत्येक भारतीय माणसाचा देशास नेण्यास पुढे नित्य श्रमावे भारत भूमि पुढें नतमस्तक व्हावे. !!६!!     कवी/साहित्यिक/विचारवंत/लेखक   श्री. जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. @जनार्दन  दिनांक १५/०८/२०२२

"धागो का कंगण"

 विषय: "धागो का कंगण"  बहना का धागो का कंगण जीसे कहे लोग रक्षाबंधन मन में विचारो की गुंजन मनाए सब मिलकर रक्षाबंधन !!1!! रक्षाबंधन का पावन त्योहार आए साल में एक बार रोक ना पायेगी कोई दिवार देता हुं शुभकामना हजार बार !!2!! पवित्र एह एक अजोड नाता भाई बहन में एकजूट लाता एक हो जाता विचार मंथन आओ मनाए मिलकर रक्षाबंधन !!3!! धागो का यह एक कंगण मीला देता सब घर आंगण पवित्र नातो का प्यारा जीवन धागो का कंगण, रक्षाबंधन !!4!! दिनांक:07/08/2022 कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. @जनार्दन कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.