"मुरली मनोहर"

 " मुरली मनोहर"

मुरली की धुन में होकर बेधुंद

नाचे गोपिया, महके मधुर सुगंध

बहती यमुना नदी के तट पर

आए गोपिया सज,धज कर   !!१!!


माखन खाए नंद किशोर

मन ही मन में आनंद विभोरं

संग अपने मित्रो को लाए

चुरा, चुराकर सब माखन खाए  !!२!!


घुस्से वाले थे कंस मामा

संग कृष्ण के मित्र सुदामा

हात में मुरली,बेहद सुरेली

मैदान में खेले डंडा गिल्ली !!३!!


मोहक सुंदर, आंख मीचौली

रास रचाए, खेले माखन होली

यशोदा मैया कहे कन्हैया

कृष्ण नाचे ता, ता थैया !!४!!


    कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद

@जनार्दन

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