"सोलह आने सच"
विषय:"सोलह आने सच"
बात कहता हुं एक
जो हैं सोलह आने सच
ईश्वर की बीन आवाज
लाठी से इंसान तू बच !!१!!
बोल के कडवे बोल
ना खोल तू अपनी पोल
छोड झुट बोल अब सच.....
ईश्र्वर की बीन आवाज
लाठी से इंसान तू बच. !!२!!
सून् हरे अवसर आयेंगे
सपने तेरे भी सच होंगे
बस खुद को कम ना समज....
ईश्र्वर की बीन आवाज
लाठी से इंसान तू बच !!३!!
कब कैसे यह ना कहना
तू ईश्वर का सुंदर गहना
तेरी पुकार होगी स्वीकार
हर एक बात कह दे सच....
ईश्र्वर की बीन आवाज
लाठी से इंसान तू बच. !!४!!
कवि: साहित्यिक लेखक
जनार्दन बाळा गोरे
छत्रपती संभाजी नगर.
@जनार्दन.
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