"वह सत युग फिर आए"
"वह सत युग फिर आए"
वह सत युग फिर आए
आदर्ष भाईयो का दोहराए
हर भाई हो राम लक्ष्मण जैसा
रिश्तो के बीच ना आए पैसा ||१||
खूश हाल जीए हर परीवार
ना हो कभी कोई तकरार
कभी जनम ना ले कोई रावण
ना कर ले कभी सिता का हरण ||२||
हर घर हो भरत सम भाई
राम भक्ती की शक्ती पाई
मंथरा सी दासी ना हो कोई
जिसने रघुकूल में आग लगा ||३||
राम राज्य की हो पुनरावृत्ती
कभी ना आयेगी कोई आपत्ती
असफलता,डर हमेशा दूर हो जाए
वह सत युग एक बार फिर आए ||४||
शबरी के मिठे बेर राम को भाए
राम राजा सब को एकसमान पाए
राजकारण का उद्दिष्ट एक हो जाए
वह सत युग एक बार फिर आए ||५||
स्वरचित काव्य रचना.
कवी: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.
@जनार्दन
दिनांक:१०/०४/२०२२.
🙏🙏🙏
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