"गजल"
गज़ल
चल तू बेफिक्र होकर, निडर,
सोच ना तू क्या होगा असर।
पाना चाहता है मंजिल अगर,
चल तू बेफिक्र होकर निडर। //१//
ठान मन में बात एक कोई,
मिलेगी जरुर बात मनचाही।
पूरा होगा जिन्द़गी का सफर,
चल तू बेफिक्र होकर निडर।//२//
अपना ले सभी सही रास्तों को,
कोसा ना कभी दुःखी मन को।
मिलेगी खुशी की हर लहर,
चल तू बेफिक्र होकर निडर।//३//
कांटे भी फूल बन जायेंगे,
तेरे वसूल भी बन पायेंगे।
अच्छा होगा सब पर असर,
चल तू बेफिक्र होकर निडर ।//४//
कवि जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. दिनांक 04/02/2022
अप्रतिम कविता
ReplyDeleteधन्यवाद आपल्या प्रतिसादाबद्दल
ReplyDelete👌👌👌
ReplyDeleteमनस्वी धन्यवाद आपल्या प्रतिसादाबद्दल
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