सुबह हूयी

     रात बीत गयी देखो

     फिर सुबह हूयी 

  जाग गये हम सारे

  घडी देखो आयी नयी //१//

सपने नये, वादे नये

दिन की हो गयी शुरुवात

सर्दियो में भी देखो हलकी

हो रही रिमझिम सी बरसात //२//

मौसम अलग हो रहा हैं

कहीं सर्दी कही गरमी

बदलाव हर दिन अलग

कही पानी कहीं बर्फ हैं जमी//३//

   कवी: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.@जनार्दन




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