"जब बागो में फुल खिले"
"जब बागो में फुल खिले"
एक पौधा छोटासा किसी ने लगाया
समय, समय उसे पाणी पिलाया
वह पौधा दीन, बदिन बढता गया
धूप, सरदी की तकलिफो से लढता गया!!१!!
उसके शरीर पर, काटे भी थे
पर वो खुदकी पहचान जाणता था
उसे मालूम था एक दिन फुलो से सजुंगा
किसी के घर, आंगण की शोभा बनुंगा!!२!!
पौधा बाग की शान बना
जब उसने खुद को जाना
जब बागों में फुल खिले
पौधे के भी छोटे फुल खिले!!३!!
पौधा बडा हूआ वह खिल, खीलाया
भवरो ने गुण, गुनाना शुरु किया
बाग की शान, पौधा बना
कांटो में रहकर खुद की पहचान बना!!४!!
गोरे जनार्दन
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