"दिल से पूछो"
दिल से पूछो
दर्द दिल का समज
ना पाया कोई मेरा
मैं ढुंढता रहा सहारा
नही बना कोई किनारा//१//
सफलता हाथ ना आयी
मंजिल खुद से दूर गयी
कोसा अपने आपको मैने
क्यु टुट गये सारे सपने //२//
चुक गये सब एकसाथ
जो लगाये थे निशाने
दुर गये सब साथी
रहे ना कोई अपने//३//
पास ना कुछ रहा
दुःख दर्द सब सहा
कुछ तो दिल से सोचो
क्या करना है दिल से पूछो//४//
कवी: जनार्दन बाळा गोरे
औरंगाबाद.
@जनार्दन_दिनांक १८/०८/२०२१
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