"प्रभात वंदन"

 "प्रभात वंदन"

प्रभात समय, लगता सुहाना

चारो ओर बदली का छाना

प्रसन्न दिखता खूब वातावरन

मिलकर करे, प्रभात वंदन //१//

अंधेरा मिटा, हो गया उजियारा

चमक उठा, जहान सारा

फुलो की महक हर तरफ

कही जम गयी, ठंडी बरफ//२//

निला आसमान, झूम उठा

धरती पर दिखती, घनघोर घटा

पेड,पौधे खेत खलिहान

कही पहाडो पर, दिखते निशान//३//

करो प्रभात वंदन सवेरे

दुर होगे  मन के अंधेरे

फुलो,कलियो से सजा आंगण

मिलकर करे सब, प्रभात वंदन//४//

दिनांक:२१/०८/२०२१.

कवि: जनार्दन बाळा गोरे

औरंगाबाद.

@जनार्दन.

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