"धूप और छाव"


विषय:"धूप और छांव"

जैसे सुख और दुःख

वैसे धूप और छांव

जिंदगी में मिलते

हर एक घाव //१//

कभी खुशीया ढेर सारी

कभी पीछे लगती बिमारी

धूप के बाद छांव आती

दुःखी मन को आनंद देती//२//

 जिंदगी की रीत पुराणी

धूप छांव सी सबकी कहानी

कभी जिंदगी सुखो का पहाड

कभी दुःख आते सुख के आड//३//

जैसे दिन और रात

जैसे सुखाऔर बरसात

एक के बाद आती

धूप और छांव  //४//

कवी जनार्दन बाळा गोरे

औरंगाबाद.

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