"उत्सव के रंग"
"उत्सव के रंग"
उत्सव के रंग आते
अपने जीवन में
खुशियो की एक महेक
बसती हमारे जीवन मे//1//
होली का आया देखो
अब पर्व पावन
जैसे आया अंबर से
झुमता रंगो का सावन//2//
कविता के रंग में
रंग जावो तुम भी
उत्सव के रंग सभी
लायेंगे जीवन में ताजगी//3//
उम्मिदो की बरसात
चलती सदा साथ साथ
मन के पंछी गगन में
भरते उडान अपने नसीब के साथ//4//
कवी: जनार्दन बाळा गोरे.
औरंगाबाद.
@जनार्दन
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