"राजा और रंक सभी फल ढोते"
"राजा और रंग सभी फल ढोते"
राजा रंक सभी फल ढोते
अपने, अपने कर्म से
अच्छा, बुरा लिखा जाता
ईश्वर कलम की स्यायी से//१//
हर काम करना सोचकर
अपने, अपने ढंग से
मन से मन जोडकर रहना
ना हसना किसी गरीब पे //२//
जैसा करोगे वैसा भरोगे
यह विधी का सत्य विधान
जियो जिन्दगी खूषहाल
पा लो जीवन का समाधान//३//
कभी मायुस ना होना
किसी भी बात से
रहना प्रसन्न सदा तुम
ना जिना कभी घमंड से//४//
राजा रंक सभी फल ढोते
बूरा काम जो भी करते
इंसानियत को बनाये रखना
जीना सदा, हसते हसते //५//
कवी: जनार्दन बाळा गोरे.
औरंगाबाद.(महाराष्ट्र).
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