"मौसम आते जाते हैं"



"मौसम आते जाते हैं"

मौसम आते जाते हैं

कभी धूप, कभी छाव

कभी भारी, होती बरसात

कभी दिखती, तैरती हुयी नाव//१//

मौसम जैसा, बदलता हर मन

हमेशा देखता अलग सपने

परेशानियो से तंग आकर

जीता जिन्दगी डर कर//२//

वक्त ki घडी बदल देती सब कुछ

होता नही कुछ भी आसान

कभी भरा रहता शमशान

कभी सब दिखता सूनसान//३//

मौसम जैसे बदलते नजारे

बदलते मौसम सभी को प्यारे

मौसम जैसा बदलता घर बार

हर मौसम में धरती का अलग शृंगार

मौसम के चलते बदलते हर कारोबार

कवी_जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.

@जनार्दन

दिनांक२५/०४/२०२१

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