"वक्त की रफ्तार"
" वक्त की रफ्तार"
होती बडी तेज हैं
वक्त की खूब रफ्तार
आए आँधी या तुफान
दिखा जाती कोई चमत्कार!!१!!
सोचता रहता हर इन्सान
दिखते सब रस्ते सुनसान
मिट जाती रात काली
लाती रफ्तार सुबह निराली!!२!!
वक्त की घडी बदलती
आशा का रूख मोडती
छाप पीछे छोड जाती
नये रासतो को अपनाती!!३!!
रुकती नहीं , थकती नहीं
रफ्तार लेती, फैसले सही
पहचान खुद रफ्तार बनाती
अपने,सपने जान जाती !!४!!
वक्त की रफ्तारको जाने
अधिकार उसका सब पहचाने
वक्त के आगे कोई नहीं
वक्त से बडा भि कोई नहीं!!५!!
दिनांक २९/०८/२०२१
कवि: जनार्दन बाळा गोरे
औरंगाबाद.©®
@जनार्दन
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