"जीवन पथ" जीवन पथ पर मुसाफिर लिख खुद अपनी तकदिर समय बित जाता हर पल फिर नयी सुबह आती निकल//१// खोज सुखो की जारी रखना हर काम से कभी ना थकना विधाता का करके हमेशा स्मरण साफ रखना अपना तनमन //२// जीवन पथ पर मुश्किले भरपूर छोडकर जिना तुम अपना घूरुर निराशा को रखो दुर हमेशा बात बात पर ना करो तमाशा//३// जिवन जिने की एकआस जिवन में मिलता कभी वनवास जिवन मिठास भरी एक प्यास ना समजना जिन्दगी को बकवास//४// रहना सतर्क सावधानी बरखकर आये हम यहा मेहमान बनकर ना करना कभी कोई तानाशाही बात नहीं मिलेगी यहा मनचाही//५// कवी: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. @जनार्दन

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