"सावन का महिना" सावन का महिना आया देखो झुम के घुमने लगे बादल संग पवन के झोके//1// चारो ओर बदली छायी देखो घनघोर उड रहे पंछी सारे होकर आनंदविभोर //2// समंदर में उठती पर्वत समान लहरे मन में छोड जाती भाव स्मरण गहरे//3// सावन का महिना लाता त्योहार सारे दुःखभरे मन में जाग उठते सितारे//4// हरी भरी धरती चारो ओर सजती करके शृंगार खुब नयन मनोहर भाती//5// दिनांक 01/08/2021. कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. @जनार्दन

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