"समझा ना कोई"

 "समझा ना कोई"

मेरे मन की आशावो को

हर पल देखे सपनो को

समझा ना कोई....

दिल के जज्जबातो को!!1!!

खयालो में कुछ नहीं रहता

दुःख दर्द चुपचाप सहता

समझा ना कोई....

तकलिफे सहकर हुं जिता!!2!!

तैर रहा मन, दिल दरिया में

गमो के आँसु लिए आँखो में

समझा ना कोई....

कैसे हरियाली पतझड में!!3!!

याद करके उन दिनो को

पल भर शांति मिलती मन को

समझा ना कोई.....

बिते हुए कल को!!4!!

कुछ बाते रही अधुरी

नहीं हुयी दिल की मुराद पुरी

समझा ना कोई.....

क्यो उम्मिद सारी बिखरी!!5!!

  दिनांक 06/08/2021

कवि : जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.

@जनार्दन

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