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अगर सब आमिर होते तो क्या होता?

 अगर सब आमिर होते तो क्या होता? अगर सब आमिर होते तो क्या होता कोई किसिका ना होता अपनी मर्जी का मालिक बनता कोई किसिकी एक ना सूनता||1|| एकदुसरे से कोई ना मिलता सब कोई खुद की मनमर्जी करता छोटा बडा सब नाता भुलाता एक दुसरे को सब रुलाता ||2|| आमिर गरीब कही नाम न होता छोटा बडा कोई काम ना होता कोई उचा ना नीचा होता हर कोई खुद को मालीक समजता||3|| सृष्टी चक्र सारा रूक जाता हवा के झोके पिकर कोई ना जिता इसलिये ईश्र्वर ने किया समझोता हर किसिको दिया काम का न्योता||4||    दिनांक13/12/2021    कवी: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद.@जनार्दन©®

"कब तक"

 "कब तक" आखिर कबतक चलता रहेगा मन को मारकर जिन्दगी जिना दुःखो की कडी धुप को मन में दबाकर कबतक सहना!!१!! क्यो नहीं होते पुरे सारे सपने दुर हो जाते क्यो सब अपने कबतक लढेगा इंसान मुसिबतो से खुल के जिएगा कब अपने मन से!!२!! कई बार हारा हैं मन यहा कब मिलेगा सुख मनचाहा राह दीखे ना कही कामयाबी की हर बात हो पुरी सोची जो मन की!!३!! कब ऐसां दीन आयेगा सामने जो पुरे करे मधूर सारे सपने हर वक्त पीछे दौड रहा कामयाबी के कब वह सुबह आयेगी निकलके !!४!! कवि: जनार्दन बाळा गोरे औरंगाबाद. दिनांक ४/१२/२०२१ @जनार्दन ©®